​सुभाष चंद्र बोस भारत की आज़ादी के एक ऐसे बॉस थे जिनमे आज़ादी के लिए हद से ज्यादा जूनून और जोश था। जिन्हें आज़ादी से कम कुछ भी मंजूर नहीं था। जो आज़ादी मांगने से ज्यादा खुद के भरोसे हासिल करने में यकीन रखते थे।“तुम मुझे खून दो,मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा” का दम्भ भरते थे। लोग जिन्हें नेताजी कहते थे। और खुद जिन्होंने महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की उपाधि दे रखी थी।आज के इस परिवेश में जब लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हैं ऐसे में यह  नेताजी का ही जादू था की हज़ारों की संख्या में लोग देश की आज़ादी के लिए खून देने को तैयार थे। आज जहाँ देश में घोटाले हो रहे हैं लूटने की होड़ मची हुई है ऐसे में यह बोस का करिश्मा ही था कि उनके कहते ही कि “हमारी एक ही इच्छा होनी चाहिए मरने की ताकि भारत जी सके” और सुनते ही हज़ारों लोग भारत भूमि पर मर मिटने को तैयार हो गए थे। आज जहाँ लोग खुद और परिवार से आगे नहीं सोच पाते वहीँ सुभाष चंद्र बोस ने देश के बारे में सोचते हुए उस समय की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा की नौकरी को ठुकरा दिया था। आज ऐसे तमाम गुणों को सुशोभित करने वाले सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन है। सुभाषचंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था।

फोटो गूगल से साभार

नेताजी ने अपना पद-परिवार सब आज़ादी की लड़ाई के लिए त्याग दिया था। सिविल सर्विस छोड़ने के बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गए। सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों से सहमत नहीं थे।महात्मा गांधी उदार दल का नेतृत्व करते थे, वहीं सुभाष चंद्र बोस गरम क्रांतिकारी दल के नेता  थे। महात्मा गाँधी और सुभाष चंद्र बोस के विचार भिन्न-भिन्न थे लेकिन उनका मक़सद एक था, देश की आज़ादी। यही वजह रही की विचारों में असहमति के वावजूद देश को गुलामी से मुक्ति दिलाने की लड़ाई में वो साथ-साथ थे। इस लड़ाई में कूदने से पहले राजनीति और कूटनीति के हर पहलु को समझने के लिए उन्होंने विश्व के कई देशों की यात्रा की थी

यह दुर्भाग्य ही था की देश आज़ाद होता उससे पहले ही कथित तौर पर नेताजी की मौत 18 अगस्त 1945 को टोक्यो जाते वक़्त एक हवाई दुर्घटना में हो गई। लेकिन इसमें आज भी संशय है कहा तो यह भी जाता है की उस जहाज में नेताजी थे ही नहीं और बाद के कई वर्षों में वह गुमनामी की जिंदगी जीते रहे। हालांकि इन बातों का भी कोई खास आधार नहीं है।पश्चिम बंगाल और केंद्र सरकार ने नेताजी से जुड़े कागजों को सार्वजनिक किया है जिनमें उनकी जिंदगी के कई अनछुए सवालों का जवाब छुपा है। सुभाष चंद्र बोस के द्वारा आज़ादी के लिए किये गए प्रयास और उनका जीवन आज सभी के लिए एक प्रेरणा है।जन्मदिन पर नमन।